Rajya Samaan Pariksha (2025-26) – Answer Key – Class XI – आज़ादी के बाद का स्वर्णिम भारत / Azadi ke Baad ka Swarnim Bharat (Part-I)

Solved Paper: Golden India After Independence (Class 11)

अर्द्ध वार्षिक परीक्षा / Half Yearly Examination (2025-26)

आजादी के बाद का स्वर्णिम भारत

Code: 1101
Class: 11th
Marks: 70
Time: 3.15 Hrs
Part A बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
(i) धन निष्कासन का सिद्धांत (Drain of Wealth Theory) किसने दिया?
(अ) दादाभाई नौरोजी
(ब) बाल गंगाधर तिलक
(स) आर.सी. दत्त
(द) गोपाल कृष्ण गोखले
उत्तर: (अ) दादाभाई नौरोजी
Additional Context
दादाभाई नौरोजी ने 1901 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘Poverty and Un-British Rule in India’ में इस सिद्धांत का प्रतिपादन किया। उन्होंने इसे ‘अनिष्टों का अनिष्ट’ (Evil of all Evils) कहा। उन्होंने गणना की थी कि भारत से प्रतिवर्ष लगभग 8 मिलियन पाउंड इंग्लैंड भेजे जा रहे थे, जिससे भारत में पूंजी निर्माण नहीं हो पा रहा था और गरीबी बढ़ रही थी।
(ii) स्थापना के पश्चात् कांग्रेस का पहला विभाजन कब हुआ?
(अ) 1905
(ब) 1906
(स) 1907
(द) 1908
उत्तर: (स) 1907 (सूरत अधिवेशन)
Historical Fact
यह विभाजन ताप्ती नदी के किनारे सूरत अधिवेशन में हुआ। मुख्य विवाद अध्यक्ष पद को लेकर था। गरम दल (Extremists) लाला लाजपत राय को अध्यक्ष बनाना चाहते थे, जबकि नरम दल (Moderates) ने रास बिहारी घोष को अध्यक्ष बनाया। इस घटना को इतिहास में ‘सूरत की फूट’ (Surat Split) के नाम से जाना जाता है।
(iii) रेगुलेटिंग एक्ट लागू होने के समय बंगाल का गवर्नर जनरल कौन था?
उत्तर: (अ) वॉरेन हेस्टिंग्स
Key Provisions
1773 का रेगुलेटिंग एक्ट: यह ब्रिटिश संसद द्वारा कंपनी के कार्यों को नियंत्रित करने का पहला प्रयास था।
1. बंगाल के गवर्नर को ‘गवर्नर जनरल’ बना दिया गया।
2. उसकी सहायता के लिए 4 सदस्यीय परिषद बनाई गई।
3. कलकत्ता में एक सुप्रीम कोर्ट (1774) की स्थापना का प्रावधान किया गया, जिसके पहले मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे थे।
(iv) किस भू–राजस्व व्यवस्था में भूमि का मालिक जमींदार को माना गया?
उत्तर: (अ) स्थायी बन्दोबस्त (Permanent Settlement)
In-Depth Detail
इसे 1793 में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा लागू किया गया। इसमें तय किया गया कि वसूल किए गए राजस्व का 10/11 भाग कंपनी को और 1/11 भाग जमींदार को मिलेगा। इसमें ‘सूर्यास्त कानून’ (Sunset Law) था, जिसके तहत निश्चित तिथि को सूर्यास्त तक पैसा जमा न करने पर जमींदारी नीलाम हो जाती थी।
(v) प्लासी का युद्ध कब हुआ?
उत्तर: (ब) 1757 में
Strategic Context
तिथि: 23 जून 1757।
स्थान: भागीरथी नदी के किनारे प्लासी (पलाशी) का मैदान।
धोखा: नवाब सिराजुद्दौला के सेनापति मीर जाफर ने गद्दारी की और युद्ध में भाग नहीं लिया। रॉबर्ट क्लाइव ने कूटनीति से यह युद्ध जीता। इसे भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की “चाबी” माना जाता है।
(vi) निम्न में से कौनसा सत्याग्रह का साधन नहीं है?
उत्तर: (स) हिंसा (Violence)
Gandhian Philosophy
सत्याग्रह का अर्थ है ‘सत्य के लिए आग्रह’ या ‘सत्य बल’ (Truth Force)। गाँधीजी के अनुसार, सत्याग्रही को अपने विरोधी को कष्ट नहीं देना है, बल्कि स्वयं कष्ट सहकर विरोधी का हृदय परिवर्तन करना है। इसलिए हिंसा और सत्याग्रह एक साथ नहीं चल सकते। उपवास, हड़ताल (शांतिपूर्ण) और सविनय अवज्ञा इसके प्रमुख अस्त्र हैं।
(vii) संविधान सभा का गठन कब हुआ?
उत्तर: (अ) 1946 में
Constitutional Facts
संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना (मई 1946) के तहत हुआ।
• कुल सदस्य: 389 (प्रारंभ में)।
• चुनाव: जुलाई-अगस्त 1946 में।
• प्रथम बैठक: 9 दिसम्बर 1946 (सच्चिदानंद सिन्हा अस्थायी अध्यक्ष)।
(viii) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कब हुई?
उत्तर: (द) 1885 में
Foundation Details
तिथि: 28 दिसम्बर 1885।
स्थान: गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, बंबई।
उपस्थिति: 72 प्रतिनिधि।
सुरक्षा वाल्व सिद्धांत (Safety Valve Theory): लाला लाजपत राय ने तर्क दिया था कि ए.ओ. ह्यूम ने कांग्रेस की स्थापना ब्रिटिश साम्राज्य को भारतीय असंतोष से बचाने के लिए ‘सुरक्षा वाल्व’ के रूप में की थी।
(ix) असहयोग आन्दोलन किस प्रश्न को लेकर प्रारम्भ हुआ?
उत्तर: (अ) खिलाफत
Background
तुर्की के सुल्तान (खलीफा) के अधिकारों को पुनर्स्थापित करने के लिए अली बंधुओं (शौकत अली और मोहम्मद अली) ने खिलाफत आंदोलन चलाया। गाँधीजी ने इसे “हिंदू-मुस्लिम एकता का ऐसा अवसर जो अगले 100 वर्षों में नहीं आएगा” मानते हुए असहयोग आंदोलन का मुख्य मुद्दा बनाया।
(x) सन् 1935 के भारत शासन अधिनियम के अनुसार, प्रान्तों में मंत्रिमण्डल कब स्थापित हुआ?
उत्तर: (अ) जुलाई 1937
Ministry Period
1937 के चुनावों में कांग्रेस ने भारी सफलता प्राप्त की। मंत्रिमण्डल ने 28 महीने तक शासन किया। अक्टूबर 1939 में, जब वायसराय ने भारत को द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल घोषित कर दिया, तो विरोध में कांग्रेस मंत्रिमंडलों ने सभी प्रांतों से सामूहिक इस्तीफा दे दिया।
प्र.2 रिक्त स्थानों की पूर्ति (Contextual Fill in the Blanks)
  • (i) महालवारी व्यवस्था ब्रिटिश भारत के 30% प्रतिशत भाग पर लागू थी।
    तुलना: स्थायी बंदोबस्त (19%) और रैयतवाड़ी (51%)। महालवारी मुख्यत: पंजाब, म.प्र. और आगरा में थी।
  • (ii) जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड की घटना 13 अप्रैल 1919 को हुई।
    संदर्भ: बैसाखी के दिन जनरल डायर ने अमृतसर में गोली चलवाई। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इसके विरोध में ‘नाइटहुड’ (सर) की उपाधि त्याग दी।
  • (iii) “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है”, का नारा बाल गंगाधर तिलक ने दिया।
    पूर्ण नारा: “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।” (लखनऊ अधिवेशन 1916)।
  • (iv) साइमन आयोग के विरुद्ध प्रदर्शन में वरिष्ठ नेता लाला लाजपत राय की मृत्यु लाठीचार्ज से हुई थी।
    अंतिम शब्द: “मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के कफन में आखिरी कील साबित होगी।”
  • (v) डॉ. भीमराव अम्बेडकर संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष चुने गए।
    समिति का गठन 29 अगस्त 1947 को हुआ। इसमें कुल 7 सदस्य थे।
  • (vi) संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद निर्वाचित हुए।
    तिथि: 11 दिसम्बर 1946। (एच.सी. मुखर्जी उपाध्यक्ष चुने गए थे)।
  • (vii) महात्मा गाँधी ने “करो या मरो” का नारा दिया।
    संदर्भ: भारत छोड़ो आंदोलन, 8 अगस्त 1942, बॉम्बे। इसका अर्थ था – “हम भारत को आजाद कराएंगे या इस प्रयास में अपनी जान दे देंगे।”
Part B अति लघुत्तरात्मक (Detailed Insights)
(i) बक्सर का युद्ध कब लड़ा गया?
उत्तर: 22 अक्टूबर 1764 ई. में।
Significance
प्लासी ने अंग्रेजों को पैर जमाने का मौका दिया, लेकिन बक्सर के युद्ध ने उन्हें भारत का वास्तविक शासक बना दिया। इसके बाद 1765 में इलाहाबाद की संधि हुई, जिससे अंग्रेजों को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की ‘दीवानी’ (राजस्व वसूलने का अधिकार) प्राप्त हुई।
(ii) किस भू–राजस्व व्यवस्था में भू–राजस्व को स्थायी कर दिया गया था?
उत्तर: स्थायी बन्दोबस्त (Permanent Settlement) में।
इसमें राजस्व की राशि हमेशा के लिए फिक्स कर दी गई थी, चाहे पैदावार बढे या घटे, सरकार राजस्व नहीं बढ़ा सकती थी।
(iii) लॉर्ड डलहौजी द्वारा किस नीति के तहत राज्यों को हड़पा गया?
उत्तर: व्यपगत का सिद्धान्त (Doctrine of Lapse)।
Impact
इस नीति ने भारतीय शासकों में घोर असुरक्षा पैदा कर दी। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का विद्रोह इसी नीति के खिलाफ था। यह 1857 की क्रांति का एक प्रमुख राजनीतिक कारण बना। 1858 में कैनिंग ने इसे समाप्त कर दिया।
(iv) गाँधी जी को सर्वप्रथम “महात्मा” किसने कहा?
उत्तर: रवीन्द्रनाथ टैगोर ने।
Context
यह उपाधि चंपारण सत्याग्रह (1917) के सफल नेतृत्व के दौरान दी गई थी। इसी समय गाँधीजी ने टैगोर को ‘गुरुदेव’ कहकर संबोधित किया था।
(v) 1876 ई. में इण्डियन एसोसिएशन का गठन किसने किया?
उत्तर: सुरेन्द्रनाथ बनर्जी और आनन्द मोहन बोस ने।
इसका उद्देश्य भारत में एक मजबूत जनमत तैयार करना और हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ाना था। बाद में 1886 में इसका विलय कांग्रेस में हो गया।
(vi) बंगाल का विभाजन कब हुआ?
उत्तर: 16 अक्टूबर 1905 (प्रभावी तिथि)।
Consequence
इस दिन को पूरे बंगाल में ‘शोक दिवस’ (Day of Mourning) के रूप में मनाया गया। लोगों ने उपवास रखा, गंगा स्नान किया और एकता के प्रतीक के रूप में एक-दूसरे को राखी बांधी (टैगोर के सुझाव पर)। इसके विरोध में ‘स्वदेशी आंदोलन’ शुरू हुआ।
(vii) भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन का उदारवादी युग कब से कब तक है?
उत्तर: 1885 ई. से 1905 ई. तक।
उदारवादी नेता (दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता, दिनशा वाचा) “ब्रिटिश न्यायप्रियता” में विश्वास रखते थे और क्रमिक सुधारों की मांग करते थे।
(viii) गाँधी इरविन समझौता कब हुआ?
उत्तर: 5 मार्च 1931 को।
सरोजिनी नायडू ने गाँधी और इरविन को “दो महात्मा” (Two Mahatmas) कहा था।
(ix) संविधान सभा की प्रारूप समिति में कितने सदस्य थे?
उत्तर: 7 सदस्य (1 अध्यक्ष + 6 अन्य सदस्य)।
सदस्य: बी.आर. अम्बेडकर (अध्यक्ष), एन. गोपालस्वामी अयंगर, अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर, के.एम. मुंशी, सैयद मोहम्मद सादुल्ला, बी.एल. मित्र (बाद में एन. माधव राव), और डी.पी. खेतान (बाद में टी.टी. कृष्णामचारी)।
(x) साइमन कमीशन के विरोध में कौनसा नारा लगाया गया?
उत्तर: “साइमन वापस जाओ” (Simon Go Back)
युसूफ मेहर अली ने “साइमन गो बैक” का नारा गढ़ा था।
Part C (I) लघुत्तरात्मक प्रश्न – I (Conceptual Clarity)
(i) ब्रिटिश काल में लागू की गई विभिन्न भू–राजस्व व्यवस्थाओं के दो दुष्परिणाम लिखिए।
  • ग्रामीण ऋणग्रस्तता और भूमि का हस्तांतरण: राजस्व को नकद में और समय पर चुकाने की बाध्यता के कारण किसान साहूकारों के जाल में फंस गए। कर्ज न चुका पाने पर उनकी जमीनें साहूकारों (गैर-कृषकों) के पास चली गईं, जिससे भूमिहीन मजदूरों की संख्या बढ़ी।
  • कृषि का ठहराव और अकाल: सरकार ने सिंचाई या कृषि सुधार पर निवेश नहीं किया, केवल लगान वसूलने पर ध्यान दिया। इसके साथ ही नकदी फसलों (नील, कपास) के दबाव ने खाद्यान्न सुरक्षा को खतरे में डाल दिया, जिससे 19वीं सदी में बार-बार भयानक अकाल पड़े।
(ii) “पावर्टी एण्ड अन–ब्रिटिश रूल इन इण्डिया” पुस्तक किसने लिखी?
उत्तर: दादाभाई नौरोजी ने।
Book Details
यह पुस्तक भारतीय राष्ट्रवाद की आर्थिक आधारशिला बनी। “Un-British” शब्द का प्रयोग उन्होंने यह दिखाने के लिए किया कि अंग्रेजों का भारत में शासन उनके अपने ही देश (ब्रिटेन) के न्याय और स्वतंत्रता के मूल्यों के खिलाफ है।
(iii) सीधी कार्यवाही दिवस कब व किसके द्वारा मनाया गया?
उत्तर: 16 अगस्त 1946 को मुस्लिम लीग द्वारा।
The Great Calcutta Killings
जिन्ना ने पाकिस्तान की मांग को लेकर कहा- “हम पिस्तौल लेकर रहेंगे”। इसके परिणामस्वरुप कलकत्ता में भयानक सांप्रदायिक दंगे हुए, जिसमें हजारों लोग मारे गए। इसे ‘द ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स’ भी कहा जाता है।
(iv) स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले भारत में प्रथम स्वतंत्रता दिवस कब मनाया गया?
उत्तर: 26 जनवरी 1930 को।
Historical Link
लाहौर अधिवेशन (1929) में रावी नदी के तट पर तिरंगा फहराया गया और पूर्ण स्वराज की शपथ ली गई। इसी ऐतिहासिक दिन की याद में हमारे संविधान को 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया, ताकि यह तिथि इतिहास में अमर रहे।
(v) संविधान का उद्देश्य प्रस्ताव कब और किसके द्वारा प्रस्तुत किया गया?
उत्तर: 13 दिसम्बर 1946 को पं. जवाहर लाल नेहरू द्वारा।
Foundation of Preamble
इसमें भारत को एक ‘संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न गणराज्य’ घोषित करने और नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता और समानता देने का वादा किया गया था। इसे 22 जनवरी 1947 को संविधान सभा ने अपनाया। यही प्रस्ताव संशोधित रूप में संविधान की प्रस्तावना (Preamble) बना।
(vi) भारत सरकार अधिनियम 1935 के दो बिन्दु बताइए।
  • प्रान्तीय स्वायत्तता (Provincial Autonomy): इस अधिनियम ने प्रान्तों से ‘द्वैध शासन’ समाप्त कर उन्हें स्वायत्तता दी। अब प्रांतीय सरकारें निर्वाचित मंत्रियों द्वारा चलाई जाने लगीं जो विधायिका के प्रति उत्तरदायी थे।
  • शक्तियों का त्रि-स्तरीय विभाजन: कानून बनाने की शक्तियों को स्पष्ट रूप से तीन सूचियों में बांटा गया – संघ सूची (59 विषय), प्रान्तीय सूची (54 विषय), और समवर्ती सूची (36 विषय)। अवशिष्ट शक्तियां (Residuary Powers) वायसराय को दी गईं।
Part C (II) लघुत्तरात्मक प्रश्न – II (Deep Dive Analysis)
(i) महालवारी पद्धति क्या है और यह पहले कहाँ लागू की गई?

महालवारी व्यवस्था (Mahalwari System):

  • अवधारणा: ‘महाल’ शब्द का अर्थ है जागीर या गाँव। इसमें राजस्व समझौता व्यक्तिगत किसान के साथ नहीं, बल्कि पूरे ग्राम समुदाय (महाल) के साथ सामूहिक रूप से किया जाता था। गाँव का मुखिया (जिसे ‘लम्बरदार’ कहा जाता था) पूरे गाँव से राजस्व एकत्र कर सरकार को देने के लिए जिम्मेदार था।
  • लागू क्षेत्र: यह व्यवस्था हॉल्ट मैकेंज़ी (Holt Mackenzie) के प्रस्ताव पर 1822 में शुरू हुई। यह मुख्य रूप से गंगा की घाटी, उत्तर-पश्चिमी प्रांत (आधुनिक पश्चिमी यूपी), मध्य भारत के कुछ हिस्सों और पंजाब में लागू की गई।
  • दोष: इसमें राजस्व की दरें बहुत ऊंची थीं और लम्बरदार अक्सर अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते थे।
Map showing Land Revenue Systems in British India

Map: Areas under Permanent, Ryotwari, and Mahalwari Systems

(ii) असहयोग आन्दोलन के कोई दो परिणाम लिखो।
  1. राजनीति का जनवादीकरण (Mass Movement): असहयोग आंदोलन से पहले राजनीति केवल उच्च शिक्षित वर्गों तक सीमित थी। इस आंदोलन ने पहली बार किसान, मजदूर, दस्तकार, व्यापारी और महिलाओं को सक्रिय रूप से स्वतंत्रता संग्राम में शामिल किया। कांग्रेस का ढांचा गांव-गांव तक फैला।
  2. मनोवैज्ञानिक क्रांति: सबसे बड़ा परिणाम यह था कि भारतीयों के मन से ब्रिटिश सत्ता का ‘खौफ’ खत्म हो गया। जेल जाना, लाठियां खाना अब शर्म नहीं, बल्कि गर्व की बात बन गई। इसने भविष्य के आंदोलनों के लिए एक निडर पीढ़ी तैयार की।
(iii) भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के उद्भव के दो कारण लिखिए।
  1. प्रशासनिक और आर्थिक एकीकरण: अंग्रेजों ने अपने लाभ के लिए रेलवे, डाक और तार का जाल बिछाया, जिसने अनजाने में भारत को एक सूत्र में पिरो दिया। उत्तर का व्यक्ति दक्षिण के व्यक्ति से जुड़ सका, जिससे ‘अखिल भारतीय’ राष्ट्रवाद की भावना जगी।
  2. प्रेस और साहित्य की भूमिका: ‘अमृत बाजार पत्रिका’, ‘द हिंदू’, ‘केसरी’ जैसे अखबारों ने ब्रिटिश शोषण को उजागर किया। बंकिम चंद्र का ‘आनंदमठ’ और ‘वंदे मातरम्’ जैसे गीतों ने लोगों में देशभक्ति का संचार किया।
(iv) लाहौर षड्यंत्र केस क्या था?

पृष्ठभूमि: 30 अक्टूबर 1928 को लाहौर में साइमन कमीशन का विरोध करते समय पुलिस अधीक्षक स्कॉट के आदेश पर सांडर्स ने लाठीचार्ज किया, जिससे ‘शेर-ए-पंजाब’ लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई।

बदला: इसका बदला लेने के लिए 17 दिसम्बर 1928 को भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और चंद्रशेखर आजाद ने गलती से स्कॉट की जगह सांडर्स की गोली मारकर हत्या कर दी।

परिणाम: बाद में 1929 में असेंबली बम कांड के बाद इन क्रांतिकारियों पर सांडर्स हत्या और राजद्रोह का मुकदमा (लाहौर षड्यंत्र केस) चला। 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फाँसी दी गई।

(v) गाँधी–इरविन समझौते के बारे में आप क्या समझते हैं?

5 मार्च 1931 को महात्मा गाँधी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच यह ऐतिहासिक समझौता हुआ। यह कांग्रेस की एक बड़ी कूटनीतिक जीत थी क्योंकि पहली बार ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों को ‘समान स्तर’ पर बात करने के लिए बुलाया।

  • मुख्य शर्तें: सरकार ने हिंसा के आरोपियों को छोड़कर बाकी सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा किया। तटीय क्षेत्रों में नमक बनाने की छूट दी गई।
  • परिणाम: गाँधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित किया और लंदन में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लेने गए।
(vi) 1919 ई. के भारत सरकार अधिनियम की दो विशेषताएँ बताइए।

इसे मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार भी कहा जाता है।

  1. प्रान्तों में द्वैध शासन (Dyarchy): यह इसकी सबसे विशिष्ट विशेषता थी। प्रांतीय विषयों को दो भागों में बांटा गया:
    • आरक्षित विषय (Reserved): पुलिस, न्याय, वित्त (गवर्नर और उसकी कार्यकारिणी के अधीन)।
    • हस्तांतरित विषय (Transferred): शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य (भारतीय मंत्रियों के अधीन)।
  2. केन्द्र में द्विसदनीय व्यवस्था: पहली बार केंद्रीय विधानमंडल को द्विसदनीय (Bicameral) बनाया गया – राज्य परिषद (Council of State – उच्च सदन) और केंद्रीय विधानसभा (Central Legislative Assembly – निम्न सदन)। प्रत्यक्ष निर्वाचन की शुरुआत भी इसी एक्ट से हुई (सीमित मताधिकार)।
Part D निबंधात्मक प्रश्न (Comprehensive Essays)
प्र.6 (i) ब्रिटिश काल में भारतीय परम्परागत उद्योगों का पतन क्यों हुआ?

भारत कभी “दुनिया की कार्यशाला” था, विशेषकर वस्त्र उद्योग में। ब्रिटिश शासन में इसके पतन (वि-औद्योगीकरण) के प्रमुख कारण:

  • भेदभावपूर्ण प्रशुल्क नीति (Discriminatory Tariff Policy): 1813 के बाद, भारत से इंग्लैंड जाने वाले सूती वस्त्रों पर 70-80% तक भारी आयात शुल्क लगाया गया, जिससे वे महंगे हो गए। वहीं, इंग्लैंड से भारत आने वाले मशीनी कपड़ों पर बहुत कम शुल्क था। इसे ‘एकतरफा मुक्त व्यापार’ (One-way Free Trade) कहा गया।
  • मशीनी युग की प्रतिस्पर्धा: इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति के कारण मशीनों से बना माल बहुत सस्ता, रंगीन और फिनिशिंग में बेहतर था। भारतीय जुलाहे, जो हाथ से काम करते थे, लागत और गति में मशीनों का मुकाबला नहीं कर सके।
  • संरक्षण का अभाव (Loss of Patronage): भारतीय हस्तशिल्प मुख्य रूप से मुगल दरबारों और देशी रियासतों (नवाबों/राजाओं) की मांग पर निर्भर था। ब्रिटिश विस्तार के साथ देशी रियासतें खत्म हो गईं, जिससे शिल्पकारों ने अपने सबसे बड़े खरीदार खो दिए।
  • रेलवे का जाल: रेलवे ने ब्रिटिश माल को भारत के दूरदराज के गाँवों तक पहुँचाया। इससे गाँव की आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था टूट गई और विदेशी माल ने स्थानीय कुटीर उद्योगों को नष्ट कर दिया।
प्र.6 (ii) गाँधीजी के सर्वोदय सिद्धान्त का अर्थ क्या है?

दर्शन: ‘सर्वोदय’ का शाब्दिक अर्थ है – ‘सबका उदय’ (Upliftment of All)। यह गाँधीजी के सामाजिक, आर्थिक और नैतिक चिंतन का सार है। यह पश्चिमी ‘उपयोगितावाद’ (अधिकतम लोगों का अधिकतम सुख) को खारिज करता है क्योंकि उसमें अल्पमत के हितों की अनदेखी हो सकती है।

  • प्रेरणा स्रोत: गाँधीजी ने रस्किन बॉन्ड की पुस्तक ‘Unto This Last’ को गुजराती में ‘सर्वोदय’ नाम से अनुवादित किया।
  • तीन मूल मंत्र:
    1. सबकी भलाई: व्यक्ति का हित समष्टि (समाज) के हित में निहित है।
    2. श्रम की गरिमा: एक वकील के काम का वही महत्त्व है जो एक नाई के काम का है, क्योंकि सबको अपनी आजीविका कमाने का समान अधिकार है।
    3. सादा जीवन: किसान और मजदूर का जीवन ही सच्चा जीवन है।
  • सामाजिक लक्ष्य: एक ऐसे वर्गविहीन, जातिविहीन और शोषण-मुक्त समाज की स्थापना जहाँ अंतिम कतार में खड़े व्यक्ति (अंत्योदय) का भी विकास हो।
प्र.6 (iii) संविधान सभा में “प्रारूप समिति” के महत्त्व को समझाइए।

संविधान सभा में कुल 22 समितियां थीं, लेकिन प्रारूप समिति (Drafting Committee) सबसे महत्वपूर्ण थी।

  • गठन व संरचना: 29 अगस्त 1947 को, आजादी के ठीक बाद इसका गठन हुआ। इसके अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अम्बेडकर थे। इसमें देश के सर्वश्रेष्ठ कानूनी दिमाग (अयंगर, अय्यर, मुंशी, सादुल्ला) शामिल थे।
  • कार्य व महत्त्व:
    • कच्चे मसौदे की जांच: बी.एन. राव (संवैधानिक सलाहकार) ने दुनिया के 60 देशों के संविधानों का अध्ययन कर एक कच्चा मसौदा तैयार किया था। प्रारूप समिति ने इसकी धारा-दर-धारा समीक्षा की।
    • एकीकरण: विभिन्न समितियों (मूल अधिकार, संघ शक्ति आदि) के प्रस्तावों को एक सुसंगत दस्तावेज में पिरोने का काम इसी समिति ने किया।
    • सभा में बचाव: डॉ. अम्बेडकर ने संविधान सभा में 114 दिनों तक चले विचार-विमर्श के दौरान हर अनुच्छेद, हर प्रावधान का तार्किक और कानूनी बचाव किया। उन्होंने जटिल से जटिल प्रश्नों का उत्तर देकर आम सहमति बनाई।
  • अतः, यदि संविधान सभा ‘शरीर’ थी, तो प्रारूप समिति उसका ‘मस्तिष्क’ थी।
प्र.7 (i) भारत की स्वतंत्रता में ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ के योगदान की समीक्षा कीजिए।

1942 का भारत छोड़ो आन्दोलन (Quit India Movement) – “अगस्त क्रांति”

यह स्वतंत्रता संग्राम का चरमोत्कर्ष था। यद्यपि इसे क्रूरता से कुचल दिया गया, लेकिन इसने अंग्रेजों के भारत छोड़ने की नींव रख दी।

  • पृष्ठभूमि: क्रिप्स मिशन (1942) की विफलता से स्पष्ट हो गया कि अंग्रेज युद्ध के दौरान भारतीयों को कोई वास्तविक शक्ति नहीं देंगे। साथ ही, बर्मा तक जापानी सेना के पहुँचने से गाँधीजी को लगा कि “भारत में अंग्रेजों की उपस्थिति जापान को आक्रमण का निमंत्रण दे रही है।”
  • ऐतिहासिक आह्वान: 8 अगस्त 1942 को बॉम्बे के ग्वालिया टैंक मैदान में गाँधीजी ने 70 मिनट के भाषण में कहा: “मैं आपको एक मंत्र देता हूँ – ‘करो या मरो’ (Do or Die)। हम भारत को आजाद कराएंगे या इस प्रयास में अपनी जान दे देंगे।”
  • आंदोलन का स्वरूप:
    • नेतृत्वविहीनता: 9 अगस्त की सुबह ‘ऑपरेशन जीरो आवर’ के तहत गाँधी, नेहरू, पटेल समेत सभी शीर्ष नेताओं को जेल में डाल दिया गया। नेतृत्व अरुणा आसफ अली, अच्युत पटवर्धन, जयप्रकाश नारायण और राममनोहर लोहिया जैसे युवा समाजवादियों ने संभाला। उषा मेहता ने ‘गुप्त कांग्रेस रेडियो’ चलाया।
    • जन-विद्रोह: यह स्वतःस्फूर्त था। छात्रों, मजदूरों और किसानों ने थानों, रेलवे स्टेशनों और डाकघरों (ब्रिटिश सत्ता के प्रतीक) को निशाना बनाया।
    • समानांतर सरकारें: बलिया (चित्तू पांडे), तामलुक (जातीय सरकार) और सतारा (प्रति सरकार) में लोगों ने ब्रिटिश राज खत्म कर अपनी सरकारें चलाईं।
  • योगदान/निष्कर्ष: इसने यह सिद्ध कर दिया कि राष्ट्रवाद अब केवल शहरों तक सीमित नहीं है। सेना और पुलिस में भी वफादारी कम होने लगी थी। अंग्रेजों को समझ आ गया कि वे भारत को अब ‘डंडे के जोर पर’ नहीं रख सकते। युद्ध खत्म होते ही सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो गई।
अथवा / OR
प्र.7 (ii) भारत के संविधान निर्माण में प्रमुख व्यक्तियों की भूमिका।

भारतीय संविधान किसी एक व्यक्ति की कृति नहीं, बल्कि सामूहिक ज्ञान का परिणाम है। इसमें चार स्तंभों की भूमिका प्रमुख रही:

(i) डॉ. भीमराव अम्बेडकर (द आर्किटेक्ट):
प्रारूप समिति के अध्यक्ष। उन्होंने संविधान को सामाजिक न्याय का दस्तावेज बनाया। अश्पृश्यता उन्मूलन और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के प्रावधान उनकी देन हैं। उन्होंने पश्चिमी लोकतंत्र के संसदीय स्वरूप को भारतीय सामाजिक ढांचे में फिट किया। के.वी. राव ने उन्हें “संविधान का जनक और जननी” दोनों कहा।
(ii) पं. जवाहर लाल नेहरू (द विजनरी):
13 दिसम्बर 1946 को उन्होंने ऐतिहासिक ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ पेश किया, जिसने संविधान को उसका दर्शन (न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व) दिया। संघ शक्ति समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने एक मजबूत केंद्र वाले संघ की वकालत की। धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद के मूल्य उन्हीं के विचारों का प्रभाव थे।
(iii) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद (द स्टेबलाइजर):
संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष। उनका काम सबसे कठिन था – 389 सदस्यों के अलग-अलग विचारों में सामंजस्य बिठाना। उन्होंने अपनी सौम्यता और धैर्य से सभा में अनुशासन बनाए रखा। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि दक्षिण भारतीयों और हिंदी भाषियों के बीच भाषा विवाद संविधान निर्माण को न रोक दे।
(iv) बी.एन. राव (द एडवाइजर):
सर बेनेगल नरसिंह राव संविधान सभा के सदस्य नहीं थे (वे सिविल सेवक थे), लेकिन उनका योगदान किसी सदस्य से कम नहीं था। उन्होंने दुनिया भर की यात्रा कर विभिन्न संविधानों का अध्ययन किया और सदस्यों के लिए ‘संवैधानिक मिसालें’ (Constitutional Precedents) तैयार कीं। उन्होंने ही संविधान का प्रथम प्रारूप (First Draft) अक्टूबर 1947 में तैयार करके दिया था।
अथवा / OR
प्र.7 (iii) भारत सरकार अधिनियम 1935 के मुख्य प्रावधानों को समझाइए।

यह ब्रिटिश संसद द्वारा भारत के लिए बनाया गया सबसे लंबा और अंतिम अधिनियम था। हमारा वर्तमान संविधान (1950) लगभग 70% इसी अधिनियम पर आधारित है (इसे ‘संविधान का ब्लू-प्रिंट’ कहा जाता है)।

  • अखिल भारतीय संघ (All India Federation): इसमें 11 ब्रिटिश प्रांतों और देशी रियासतों को मिलाकर एक संघ बनाने का प्रस्ताव था। रियासतों के लिए इसमें शामिल होना स्वैच्छिक था। चूंकि रियासतें शामिल नहीं हुईं, इसलिए यह संघ कभी अस्तित्व में नहीं आया।
  • प्रान्तीय स्वायत्तता (Provincial Autonomy): यह सबसे सफल प्रावधान था। प्रांतों को गवर्नर के निरंकुश नियंत्रण से मुक्त किया गया। वहां चुनी हुई सरकारें बनीं। द्वैध शासन को प्रांतों से हटाकर केंद्र में लागू करने का प्रावधान किया गया।
  • शक्तियों का विभाजन: संघीय ढांचे को मजबूत करने के लिए विषयों को तीन सूचियों में बांटा गया:
    • संघ सूची: 59 विषय (रक्षा, विदेश, मुद्रा)।
    • प्रांतीय सूची: 54 विषय (पुलिस, शिक्षा)।
    • समवर्ती सूची: 36 विषय (विवाह, श्रम)।
  • संघीय न्यायालय (Federal Court): दिल्ली में एक संघीय न्यायालय (1937) की स्थापना की गई, जो प्रान्तों और केंद्र के बीच विवाद सुलझाता था। (यही बाद में भारत का सुप्रीम कोर्ट बना)।
  • अन्य प्रावधान: बर्मा को भारत से अलग किया गया। सिंध और उड़ीसा दो नए प्रांत बनाए गए। आरबीआई (RBI) की स्थापना की सिफारिश भी इसी ढांचे के अंतर्गत थी।

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