ELC Activity: नोटा (NOTA) को जानें

ELC Club – Know NOTA (नोटा को जानें)
Class 10 Civics Module

नोटा (NOTA) को जानें

‘इनमें से कोई नहीं’ (None of the Above) के अधिकार को समझें

NOTA क्या है?

NOTA (None of the Above) या ‘उपर्युक्त में से कोई नहीं’ भारतीय मतदाताओं को दिया गया एक विकल्प है। यह उन मतदाताओं को अपनी अस्वीकृति दर्ज करने का अधिकार देता है जो अपने चुनाव क्षेत्र के किसी भी उम्मीदवार को योग्य नहीं मानते।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला (2013)

27 सितंबर 2013 को PUCL बनाम भारत संघ मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि नागरिकों को नकारात्मक वोट देने का अधिकार होना चाहिए। कोर्ट ने कहा, “नकारात्मक वोटिंग से चुनाव में सुचिता (Purity) आएगी और राजनीतिक दलों को बेहतर उम्मीदवार उतारने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।”

वैश्विक संदर्भ: भारत दुनिया का 14वां देश है जिसने NOTA लागू किया। इससे पहले फ्रांस, बेल्जियम, ब्राजील और ग्रीस जैसे देशों में यह व्यवस्था थी।

Electronic Voting Machine (Ballot Unit)

BALLOT UNIT
READY
1 Candidate A
2 Candidate B
NOTA
3
NOTA None of the Above
🚫
NOTA का बटन हमेशा सूची के अंत में होता है और इसका रंग गुलाबी होता है।

NOTA का सफर

2001

ECI ने सरकार से नकारात्मक वोट का प्रावधान लाने की सिफारिश की।

2004

PUCL ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की।

2013 (Sep)

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: NOTA अनिवार्य।

2013 (Nov)

5 राज्यों (MP, Raj, Chatt, Miz, Delhi) के चुनावों में पहली बार प्रयोग।

2018

SC ने कहा: राज्यसभा चुनावों में NOTA लागू नहीं होगा।

नियम 49-O बनाम NOTA

NOTA से पहले, यदि कोई मतदाता वोट नहीं देना चाहता था, तो उसे Rule 49-O (Conduct of Election Rules, 1961) का उपयोग करना पड़ता था। जानिए यह NOTA से कैसे अलग था:

Rule 49-O (Old)
  • मतदाता को रजिस्टर (Form 17A) में हस्ताक्षर करना पड़ता था।
  • गोपनीयता खत्म हो जाती थी (सबको पता चल जाता था कि आपने वोट नहीं दिया)।
  • पोलिंग एजेंट मतदाता को डरा-धमका सकते थे।
  • प्रक्रिया लंबी और शर्मनाक थी।
NOTA (New)
  • EVM पर बस एक बटन दबाना होता है।
  • पूर्ण गोपनीयता (Secrecy) बनी रहती है।
  • किसी को पता नहीं चलता कि आपने NOTA चुना है।
  • यह सुरक्षित, तेज और भयमुक्त है।

पक्ष और विपक्ष (Pros & Cons)

फायदे (Advantages) सीमाएं (Limitations)
1. गोपनीयता: मतदाता की पहचान गुप्त रहती है। 1. प्रतीकात्मक: लोकसभा/विधानसभा में इसका परिणाम पर कोई असर नहीं होता।
2. फर्जी वोट पर रोक: अगर आप वोट नहीं देंगे, तो कोई और डाल सकता है। NOTA इसे रोकता है। 2. राइट टू रिजेक्ट नहीं: यह उम्मीदवार को खारिज करने का अधिकार नहीं देता, सिर्फ असंतोष दर्ज करता है।
3. नैतिक दबाव: यह पार्टियों को संदेश देता है कि जनता उनके उम्मीदवारों से खुश नहीं है। 3. धन की बर्बादी: आलोचक कहते हैं कि दोबारा चुनाव (जहां लागू हो) कराने से खर्च बढ़ता है।

NOTA परिणाम सिम्युलेटर

देखें कि क्या होता है जब NOTA को वोट मिलते हैं।

Class 10 Lab

1. Set Vote Counts

Candidate A 30
Candidate B 25
NOTA 45

Scenario:

Adjust the sliders to see who wins under current Indian Parliamentary rules.

30
🧑‍⚖️
A
25
👷
B
45
🚫
NOTA
परिणाम विश्लेषण (Result Analysis)

Adjust values to see the result.

भ्रांतियाँ बनाम तथ्य (Myths vs Facts)

मिथक (Myth)

“अगर NOTA को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, तो चुनाव रद्द हो जाएगा।”

तथ्य (Fact)

गलत। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में, NOTA के वोट ‘अमान्य’ की तरह माने जाते हैं। जिस भी उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, वह जीतता है, भले ही NOTA के वोट उनसे ज्यादा हों।

मिथक (Myth)

“NOTA वोट की गिनती नहीं होती, यह बेकार है।”

तथ्य (Fact)

गलत। NOTA वोटों की गिनती की जाती है और परिणाम में दर्ज किया जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि आपका वोट किसी और द्वारा गलत इस्तेमाल न किया जाए (फर्जी वोटिंग)।

NOTA Master Quiz

Test your knowledge (25 Questions)

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