RBSE Class 10th – Sanskrit (संस्कृत) – Blueprint 2025-26 with Solved Model Paper

RBSE 10th Sanskrit Model Paper 2026 (Solved & Explained)
Under The Esteemed Guidance of
Shri Susheel Kumar Sharma (Principal)
📚 OMA RAM 📚
Senior Teacher, Sanskrit
gsssjethantri.in

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थानम्

नमूना प्रश्न-पत्रम् (Model Paper) 2026

विषयः – संस्कृतम् (कक्षा – दशमी)

⏳ समयः: 3 घण्टे 15 मिनट 📝 पूर्णाङ्काः: 80

1. उद्देश्यानाम् अंकभारः (Weightage by Objectives)

क्र.सं. उद्देश्यम् अंकभारः प्रतिशतम्
1.ज्ञानम् (Knowledge)2328.75%
2.अवबोधः (Understanding)3037.50%
3.ज्ञानोपयोगः (Application)0911.25%
4.कौशलम् (Skill)1316.25%
5.विश्लेषणम् (Analysis)056.25%
योगः (Total) 80 100%

2. प्रश्नानां प्रकारानुसारम् अंकभारः (Weightage by Question Type)

क्र.सं. प्रश्नानां प्रकाराः संख्या अंक प्रति प्रश्न कुल अंक प्रतिशत (अंक) समय
1.बहुविकल्पात्मक (MCQ)1811822.50%25 min
2.रिक्तस्थानम् (Fill in Blanks)061067.50%15 min
3.अतिलघुत्तरात्मक (VSA)1711721.25%40 min
4.लघुत्तरात्मक (Short Ans)0921822.50%40 min
5.दीर्घोत्तरीय (Long Ans)0330911.25%30 min
6.निबन्धात्मक (Essay Type)0341215.00%45 min
योगः (Total) 56 80 100% 195 min

3. विषयवस्तूनाम् अंकभारः (Topic-wise Weightage)

संकेत (Key): MCQ (1) रिक्त (1) अतिलघु (1) लघु (2) दीर्घ (3) निबंध (4)
विषयवस्तु / उपविधा (Topic) अंक प्रश्नों का विवरण (Questions Detail)
1. अपठित-अवबोधनम् (Unseen Passage) 8 6 अतिलघु 1 लघु
2. रचनात्मककार्यम् (Composition) 15 1 दीर्घ 3 निबंध
3. अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् (Applied Grammar) 24 10 MCQ 6 रिक्त 4 लघु
4. पठित-अवबोधनम् (Textbook) 33 8 MCQ 6 अतिलघु 8 लघु 1 दीर्घ
कुल योग (Total) 80 56 प्रश्न
1. अधोलिखितप्रश्नानां उचितविकल्पं चित्वा लिखत (MCQs):
(i) ‘शुचिपर्यावरणम्’ पाठानुसारेण केषां माला रमणीया?
(अ) मौक्तिकानाम्
(ब) रूप्यकाणाम्
(स) पुष्पाणाम्
(द) ललितलतानाम्
✅ उत्तरम्: (द) ललितलतानाम्
पाठ ‘शुचिपर्यावरणम्’ में कवि कहते हैं “हरिततरूणां ललितलतानां माला रमणीया” अर्थात हरे वृक्षों और सुंदर लताओं की माला रमणीय है। यह पाठ पर्यावरण शुद्धता पर केंद्रित है।
(ii) ‘बुद्धिर्बलवती सदा’ कथा कुतः संगृहीता?
(अ) हितोपदेशतः
(ब) शुकसप्ततितः
(स) बृहत्कथातः
(द) पंचतन्त्रतः
✅ उत्तरम्: (ब) शुकसप्ततितः
‘शुकसप्ततिः’ (तोते की सत्तर कहानियाँ) नामक कथा संग्रह से यह पाठ लिया गया है, जिसमें एक बुद्धिमती महिला अपनी बुद्धि से बाघ के भय से मुक्त होती है।
(iii) सर्वेष्वपत्येषु जननी कीदृशी भवति?
(अ) तुल्यवत्सला
(ब) प्रसन्ना
(स) कातरा
(द) असमम्
✅ उत्तरम्: (अ) तुल्यवत्सला
जननी (माता) सभी संतानों (अपत्येषु) पर समान स्नेह (तुल्यवत्सला) रखने वाली होती है, यद्यपि दुर्बल पुत्र पर उसका स्नेह अधिक होता है।
(iv) सम्पत्तौ विपत्तौ च केषाम् एकरूपता भवति?
(अ) धनिकानाम्
(ब) बालानाम्
(स) महताम्
(द) निर्धनानाम्
✅ उत्तरम्: (स) महताम्
श्लोक: “सम्पत्तौ च विपत्तौ च महतामेकरूपता”। महान लोग सुख और दुःख दोनों परिस्थितियों में समान (स्थिर) रहते हैं, जैसे सूर्य उगते और डूबते समय लाल रहता है।
(v) कः वातावरणं कर्कशध्वनिना आकुलीकरोति?
(अ) काकः
(ब) मयूरः
(स) कपोतः
(द) पिकः
✅ उत्तरम्: (अ) काकः
कौआ (काकः) अपनी कठोर (कर्कश) आवाज से वातावरण को व्याकुल करता है। कोयल (पिकः) की आवाज मधुर होती है।
(vi) आत्मनः श्रेयः इच्छन् नरः कीदृशं कर्म न कुर्यात्?
(अ) हितम्
(ब) प्रियम्
(स) अहितम्
(द) अनुकूलम्
✅ उत्तरम्: (स) अहितम्
जो मनुष्य अपना भला (श्रेय) चाहता है, उसे दूसरों के लिए कभी भी अहितकर (बुरा) कर्म नहीं करना चाहिए।
(vii) ‘विशीर्णाः’ गृहसोपानमार्गाः – रेखाङ्कितपदस्य अर्थः कः?
(अ) भ्रष्टाः
(ब) नष्टाः
(स) विलुप्ताः
(द) विशिष्टाः
✅ उत्तरम्: (ब) नष्टाः
‘विशीर्णाः’ का शाब्दिक अर्थ है ‘टूटा हुआ’, ‘बिखरा हुआ’ या ‘नष्ट हुआ’। यहाँ टूटी हुई सीढ़ियों के संदर्भ में है।
(viii) ‘अम्भोदाः’ बहवो हि सन्ति – रेखाङ्कितपदस्य अर्थः?
(अ) खगाः
(ब) कमलानि
(स) पर्वताः
(द) मेघाः
✅ उत्तरम्: (द) मेघाः
शब्द व्युत्पत्ति: अम्भः (जल) + दा (देने वाला) = अम्भोदः। जल देने वाला कौन? मेघ (बादल)।
व्याकरण-सम्बन्धि-प्रश्नाः (Grammar Questions):
(ix) ‘प्रकृतिः + एव’ इत्यस्य सन्धिपदं किम्?
(अ) प्रकृतिरेव
(ब) प्रकृति एव
(स) प्रकृतिमेव
(द) प्रकृत्यैव
✅ उत्तरम्: (अ) प्रकृतिरेव
नियम (ऋत्व विसर्ग सन्धि): यदि विसर्ग (:) से पहले ‘अ/आ’ को छोड़कर कोई अन्य स्वर हो और बाद में कोई भी स्वर या घोष वर्ण हो, तो विसर्ग का ‘र्’ हो जाता है। (प्रकृतिः + एव = प्रकृतिर् + एव = प्रकृतिरेव)।
(x) ‘सञ्चरणम्’ इत्यस्य सन्धिविच्छेदोऽस्ति-
(अ) सम् + चरणम्
(ब) सत् + चरणम्
(स) सन् + चरणम्
(द) संच + रणम्
✅ उत्तरम्: (अ) सम् + चरणम्
नियम (अनुस्वार/परसवर्ण): ‘म्’ के बाद यदि कोई वर्गीय व्यंजन (जैसे ‘च’) आए, तो ‘म्’ उसी वर्ग के पंचम वर्ण (ञ्) में बदल जाता है। सम् + चरणम् = सञ्चरणम्।
(xi) पररूपसन्धेः उदाहरणमस्ति-
(अ) कोऽपि
(ब) वयमपि
(स) शकन्धुः
(द) राष्ट्रम्
✅ उत्तरम्: (स) शकन्धुः
वार्तिक: “शकन्ध्वादिषु पररूपम् वाच्यम्”। साधारणतः अ+अ = आ होता है, लेकिन शकन्धु, कर्कन्धु आदि शब्दों में यह ‘अ’ ही रहता है (पररूप हो जाता है)। शक + अन्धुः = शकन्धुः।
(xii) ‘उपग्रामम्’ इति पदे कः समासः?
(अ) द्वन्द्वः
(ब) अव्ययीभावः
(स) कर्मधारयः
(द) बहुव्रीहिः
✅ उत्तरम्: (ब) अव्ययीभावः
अव्ययीभाव समास: इसमें प्रथम पद अव्यय (उपसर्ग) होता है और प्रधान होता है। ‘उप’ का अर्थ समीप है। विग्रह: ‘ग्रामस्य समीपम्’ (गाँव के पास)। समस्त पद नपुंसकलिंग एकवचन होता है।
(xiii) ‘परितः’ इति पदयोगे का विभक्तिः भवति?
(अ) प्रथमा
(ब) चतुर्थी
(स) षष्ठी
(द) द्वितीया
✅ उत्तरम्: (द) द्वितीया
उपपद विभक्ति: “अभितः परितः समया निकषा हा प्रतियोगेऽपि”। इन सभी शब्दों के योग में द्वितीया विभक्ति होती है। (जैसे: ग्रामं परितः वृक्षाः सन्ति)।
(xiv) ‘दुह्’ धातुयोगे का विभक्तिः भवति?
(अ) द्वितीया
(ब) तृतीया
(स) चतुर्थी
(द) पंचमी
✅ उत्तरम्: (अ) द्वितीया
सूत्र “अकथितं च”: संस्कृत में 16 द्विकर्मक धातुएं हैं (दुह्, याच, पच्, दण्ड् आदि)। इनके साथ गौण कर्म में भी द्वितीया विभक्ति होती है। (जैसे: गां दोग्धि पयः – गाय से दूध दुहता है)।
(xv) अङ्गविकारे शब्दे का विभक्तिः भवति?
(अ) सप्तमी
(ब) पंचमी
(स) तृतीया
(द) चतुर्थी
✅ उत्तरम्: (स) तृतीया
सूत्र “येनाङ्गविकारः”: जिस अंग में कोई विकार (दोष) दिखाई दे, उस अंग वाचक शब्द में तृतीया विभक्ति होती है। (जैसे: नेत्रेण काणः, पादेन खञ्जः)।
(xvi) _______ गृहं गम्यते। अत्र पूरणीयं पदं किम्?
(अ) अहम्
(ब) मया
(स) माम्
(द) आवाम्
✅ उत्तरम्: (ब) मया
वाच्य परिवर्तन: वाक्य में क्रिया ‘गम्यते’ (आत्मनेपद/कर्मवाच्य) है। कर्मवाच्य में कर्ता में हमेशा तृतीया विभक्ति होती है। ‘अस्मद्’ शब्द की तृतीया एकवचन ‘मया’ है।
(xvii) मम पिता प्रातः (5:15) वादने उत्तिष्ठति।
(अ) सपादषड्
(ब) सार्धपंच
(स) पादोनपंच
(द) सपादपंच
✅ उत्तरम्: (द) सपादपंच
समय लेखन: 15 मिनट = सपाद, 30 मिनट = सार्ध, 45 मिनट = पादोन। 5:15 का अर्थ है सवा पांच। संस्कृत में: सपाद (15) + पंच (5) = सपादपंचवादने।
(xviii) “आज्ञापयतु भवन्तः” – रेखाङ्कितपदस्य शुद्धरूपं किम्?
(अ) भवन्तौ
(ब) भवन्तम्
(स) भवते
(द) भवान्
✅ उत्तरम्: (द) भवान्
वाक्य शुद्धि: क्रिया ‘आज्ञापयतु’ (लोट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन) है। कर्ता और क्रिया का वचन समान होना चाहिए। ‘भवन्तः’ बहुवचन है, इसका एकवचन रूप ‘भवान्’ है।
2. निर्देशानुसारं रिक्तस्थानानि पूरयत (1 × 6 = 6):
(i) अत्यादरः ________ । (शङ्क + अनीयर)
✅ उत्तरम्: शङ्कनीयः
अनीयर प्रत्यय: यह ‘चाहिए’ या ‘योग्य’ अर्थ में आता है। शङ्क + अनीयर = शङ्कनीय। चूंकि ‘अत्यादरः’ पुंलिंग है, इसलिए यह ‘शङ्कनीयः’ बना। (ज्यादा आदर शंका के योग्य होता है)।
(ii) बालानां ________ कः न जानाति । (चपल + त्व)
✅ उत्तरम्: चपलत्वम्
त्व प्रत्यय: यह भाववाचक संज्ञा बनाता है और हमेशा नपुंसकलिंग में होता है। चपल + त्व = चपलत्वम् (चंचलता)।
(iii) शक्तिः सदा ________ भवति। (बल + मतुप्)
✅ उत्तरम्: बलवती
मतुप् प्रत्यय: ‘वाला’ अर्थ में। बल + मतुप् = बलवत्। विशेष्य ‘शक्तिः’ स्त्रीलिंग है, इसलिए विशेषण भी स्त्रीलिंग होगा। बलवत् -> बलवती।
(iv) ________ कुशलं महाराजस्य ? (अपि, एव, विना)
✅ उत्तरम्: अपि
अव्यय प्रयोग: जब ‘अपि’ वाक्य के आरंभ में आता है, तो यह प्रश्नसूचक (क्या?) बन जाता है। “क्या महाराज कुशल हैं?”
(v) योजकः ________ दुर्लभः। (यत्, इव, तत्र)
✅ उत्तरम्: तत्र
यह प्रसिद्ध श्लोक का अंश है: “अमन्त्रम् अक्षरं नास्ति… योजकस्तत्र दुर्लभः”। तत्र का अर्थ है ‘वहाँ’ (उस स्थिति में)।
(vi) एकः ________ खगो मानी वने वसति चातकः। (एव, यथा, तथा)
✅ उत्तरम्: एव
श्लोक: “एक एव खगो मानी…”। ‘एव’ का अर्थ है ‘ही’। (एक ही स्वाभिमानी पक्षी वन में रहता है – चातक)।
3 अपठित-अवबोधनम् (Unseen Passage) – 8 अंकाः
संसारे अनेकाः ऋतवः भवन्ति, किन्तु भारतवर्षे षड्ऋतवः प्रमुखाः सन्ति। तासां नामानि वसन्तः, ग्रीष्मः, वर्षाः, शरदः, हेमन्तः, शिशिरः सन्ति। एतासु ऋतुषु वर्षतोः अति महत्त्वम् अस्ति यतो हि भारतदेशः एकः कृषिप्रधान देशः अस्ति। भारतवर्षस्य कृषकाः ग्रामेषु एव वसन्ति ते वर्षायां एवं निर्भराः भवन्ति। ग्रीष्मतापेन सन्तप्तोऽयं लोकः वर्षासमये सुखानुभवं करोति। कृषकाः बलीवर्दान् संमोज्य क्षेत्रकर्षणम् आरभन्ते।
(क) एकपदेन उत्तरत:
  • (i) भारतवर्षे कति ऋतवः भवन्ति? 👉 षड् (छह)
  • (ii) कया मानवस्य जीवनं निर्विघ्नं प्रचलति? 👉 सुवृष्ट्या (अच्छी वर्षा से)
(ख) पूर्णवाक्येन उत्तरत:
  • के वर्षायाम् एव निर्भराः भवन्ति?
    👉 भारतवर्षस्य कृषकाः वर्षायाम् एव निर्भराः भवन्ति।
(ग) शीर्षकम्:
वर्षाऋतोः महत्त्वम् / भारतस्य ऋतवः
(घ) भाषिककार्यम् (व्याकरण विश्लेषण):
1. ‘अनुभवन्ति’ का कर्ता? युवतयः (गद्यांश के अगले भाग से)।
2. ‘संसारे अनेकाः ऋतवः’ में विशेष्य? ऋतवः (जिसकी विशेषता बताई जाए)।
3. ‘तासां नामानि’ में ‘तासाम्’ किसके लिए? ऋतूनां (ऋतुओं के लिए)।
4 समयलेखनम् (Time Writing)

(i) अहं प्रातः (7:15) सपाद-सप्तवादने विद्यालयं गच्छामि।

(ii) छात्राः प्रातः (11:00) एकादशवादने भोजनं कुर्वन्ति।

15 = सपाद, 30 = सार्ध, 45 = पादोन, 00 = पूर्ण शब्द (जैसे एकादश)।
5 वाक्यशुद्धिः

अशुद्ध: ‘वृक्षे उपरि काकः तिष्ठति।’

शुद्ध: वृक्षस्य उपरि काकः तिष्ठति।
नियम: ‘उपरि’ (ऊपर), ‘अधः’ (नीचे), ‘पुरतः’ (सामने) आदि के योग में षष्ठी विभक्ति (का, के, की) का प्रयोग होता है। (वृक्ष के ऊपर = वृक्षस्य उपरि)।
6 वाच्यपरिवर्तनम्

कर्तृवाच्य: ‘छात्राः गुरुं नमन्ति।’

कर्मवाच्य: छात्रैः गुरुः नम्यते।
1. कर्ता (छात्राः) -> तृतीया (छात्रैः)
2. कर्म (गुरुम्) -> प्रथमा (गुरुः – एकवचन)
3. क्रिया कर्म के अनुसार आत्मनेपद (नम्यते)
7 समासविग्रहः

पद: ‘नीलोत्पलम्’

विग्रह: नीलम् उत्पलम् (कर्मधारय समास)
कर्मधारय समास: जब विशेषण (नीलम्) और विशेष्य (उत्पलम् – कमल) का मेल हो। ‘नीला कमल’।
8 श्लोक भावार्थः (हिन्दी)
आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः…
भावार्थ: आलस्य मनुष्य के शरीर में स्थित सबसे बड़ा शत्रु है। परिश्रम (उद्यम) के समान कोई मित्र (भाई) नहीं है, जिसे करके मनुष्य कभी दुखी नहीं होता।
9 अन्वयः (Prose Order)

विचित्रे संसारे (i) किंचित् निरर्थकम् (ii) नास्ति। खलु चेत् अश्वः धावने (iii) वीरः (तर्हि) खरः (iv) भारस्य वहने (वीरः)।

अन्वय का अर्थ है श्लोक के शब्दों को गद्य (Prose) के सही व्याकरणिक क्रम में लगाना।
10 प्रश्ननिर्माणम्

(क) सिंहः वानराभ्यां स्वरक्षायाम् असमर्थः। -> काभ्याम् / कैः? (तृतीया/पंचमी द्विवचन/बहुवचन)

(ख) तत्र राजसिंहो नाम राजपुत्रः। -> कः? (पुंलिंग प्रथमा एकवचन)

(ग) विवेकेन निर्णयः शक्यः। -> केन? (तृतीया एकवचन)

11 पाठसारः (Summary Writing)

प्रश्न: ‘जननी तुल्यवत्सला’ अथवा ‘सौहार्द प्रकृतेः शोभा’ का सार हिन्दी में लिखें।

जननी तुल्यवत्सला: यह पाठ महाभारत के वनपर्व से लिया गया है। इसमें बताया गया है कि माता का प्रेम सभी संतानों के लिए समान होता है। जब इन्द्र सुरभि (कामधेनु) से उसके रोने का कारण पूछते हैं, तो वह बताती है कि उसका एक कमजोर पुत्र (बैल) खेत में गिरने पर किसान द्वारा पीटा जा रहा है। यह सुनकर इन्द्र द्रवित हो जाते हैं। संदेश: माता का हृदय कमजोर संतान के प्रति अधिक दयालु होता है।
12 गद्यांश-अवबोधनम् (Textual Passage)
विचित्रा दैवगतिः। तस्यामेव रात्रौ तस्मिन् गृहे कश्चन चौरः गृहाभ्यन्तरं प्रविष्टः… (चौर और अतिथि की कहानी)

(क) चौरः कुत्र प्रविष्टः? उत्तर: गृहाभ्यन्तरम् (घर के अंदर)।

(ख) यद्यपि कः एव चौरः आसीत्? उत्तर: यद्यपि ग्रामस्य आरक्षी एव चौरः आसीत्।

भाषिक कार्य:
1. ‘उच्चैः’ का विशेषण? यह अव्यय है, पर यहाँ क्रिया-विशेषण की तरह है।
2. ‘पलायितः’ में क्रियापद? ‘पलायितः’ (भाग गया – क्त प्रत्यय युक्त क्रिया)।
13 पद्यांश-अवबोधनम् (Verses Comprehension)
हरिततरुणां ललितलतानां माला रमणीया।
कुसुमावलिः समीरचालिता स्यान्मे वरणीया।।
नवमालिका रसालं मिलिता रुचिरं संगमनम्।

(क) का रसालं मिलिता? उत्तर: नवमालिका (चमेली)।

(ख) मे का वरणीया स्यात्? उत्तर: समीरचालिता कुसुमावलिः मे वरणीया स्यात्।

(ग) भाषिककार्यम्:
1. ‘मे’ सर्वनाम किसके लिए? 👉 कवये (कवि के लिए)
2. ‘रमणीया माला’ में विशेष्य? 👉 माला
अथवा / OR
भुक्ता मृणालपटली भवता निपीता-
न्यम्बूनि यत्र नलिनानि निषेवितानि ।
रे राजहंस ! वद तस्य सरोवरस्य,
कृत्येन केन भवितासि कृतोपकारः ।।

(क) के अम्बूनि निपीतानि? उत्तर: राजहंसेन।

(ख) राजहंसेन किं भुक्ता? उत्तर: मृणालपटली (कमल-नाल का समूह)।

14 नाट्यांश-अवबोधनम् (Dramatic Passage)
(राम, लव और कुश का संवाद)
रामः – कथमस्मत्समानाभिजनौ संवृत्तौ?
विदूषकः – किं द्वयोरप्येकमेव प्रतिवचनम्?
लवः – भ्रातरावावां सोदयौं…
रामः – समरूपः शरीरसन्निवेशः। वयसस्तु न किञ्चिदन्तरम्।

(क) यमलौ कौ आसन्? उत्तर: लवकुशौ।

(ख) लवकुशयोः समुदाचारः कीदृशः आसीत्? उत्तर: उदात्तरम्यः (अत्यंत शिष्ट और सुंदर)।

(ग) भाषिककार्यम्:
1. ‘अहमपि कुश…’ में ‘अहम्’ कौन? 👉 कुशः
2. ‘समरुपः शरीरसन्निवेशः’ में विशेषण? 👉 समरुपः
अथवा / OR
(सिंह और वानर का संवाद)
सिंहः- (क्रोधेन गर्जन्) भोः अहं वनराजः किं भयं न जायते?
वानरः- यतः त्वं वनराजः भवितुं तु सर्वथाऽयोग्यः। राजा तु रक्षकः भवति परं भवान् तु भक्षकः।

(क) वनराज कैः तुदन्ति? उत्तर: तुच्छजीवैः (वानरैः)।

(ख) राजा कीदृशः भवति? उत्तर: राजा तु रक्षकः भवति।

(ग) भाषिककार्यम्:
1. क्रियापद: ‘तुदन्ति’
2. ‘असमर्थः’ का विशेषण: स्वरक्षायाम् (contextual check required).
15 पत्रलेखनम् (Letter Writing)

(1) अवकाशार्थं प्रार्थना-पत्रम् (Leave Application)

सेवायाम्,

श्रीमन्तः प्रधानाचार्याः महोदयाः,

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयः, जोधपुरम्।

विषयः – दिनत्रयस्य अवकाशार्थं प्रार्थना-पत्रम्।

महोदयाः,

सविनयम् निवेदनम् अस्ति यत् मम अग्रजाभगिन्याः विवाहोत्सवः आगामी सप्ताहे भविष्यति। अहम् तस्मिन् उत्सवे सम्मिलिता भवितुम् इच्छामि। अतः विद्यालयम् आगन्तुं न शक्नोमि।

कृपया 25-08-20xx तः 27-08-20xx पर्यन्तं दिनत्रयस्य अवकाशं दत्त्वा माम् अनुगृह्णन्तु भवन्तः।

भवदीया शिष्या

अनुष्का

कक्षा – दशमी

अथवा / OR

(2) सखी को संस्कृत दिवस पर पत्र (Fill in the blanks):

सादरं नमस्ते (i)। अत्र कुशलम् (ii) तत्रास्तु। समग्रदेशे रक्षाबन्धन दिवसे (iii) संस्कृतदिवसः परिपाल्यते। वयमपि तदा विद्यालये संस्कृतदिवसम् (iv) पालयामः। अहमपि संस्कृतदिवसे संस्कृतं गीतम् (v) गायामि। मम सखी संस्कृते भाषणम् (vi) ददाति। एषा संस्कृतभाषा (vii) सर्वभाषाजननी अस्ति। अतः मह्यम् (viii) संस्कृतं रोचते।

16 चित्रवर्णनम् / संवादलेखनम्
(1) चित्रवर्णनम् (Cricket Scene):
Cricket Scene
1. इदं चित्रं कंदुकक्रीडायाः (क्रिकेट) अस्ति। (यह चित्र क्रिकेट का है।)
2. अत्र क्रीडांगणे बालकाः क्रीडन्ति। (यहाँ मैदान में बालक खेल रहे हैं।)
3. एकः बालकः कंदुकं क्षिपति। (एक बालक गेंद फेंक रहा है।)
4. अपरः बालकः वल्लकेन (बल्ला) ताडयति। (दूसरा बालक बल्ले से मार रहा है।)
5. स्तोभरक्षकः (विकेटकीपर) सज्जः अस्ति। (विकेटकीपर तैयार है।)
6. सर्वे प्रेक्षकाः प्रसन्नाः सन्ति। (सभी दर्शक प्रसन्न हैं।)
7. क्रीडा स्वास्थ्यवर्धका भवति। (खेल स्वास्थ्यवर्धक होता है।)
8. इदं दृश्यं अति मनोहरं अस्ति। (यह दृश्य बहुत सुंदर है।)
अथवा / OR
(2) संवाद लेखनम् (जयपुर भ्रमणम्):
कोमलः: जीनू! श्वः भवान् कुत्र गमिष्यति।
जीनूः: अहं श्वः जयपुरं गमिष्यामि।
कोमलः: तत्र किमपि कार्यं वर्तते?
जीनूः: कार्यं नास्ति, अहं तु मित्रैः सह भ्रमणार्थ गच्छामि।
कोमलः: कुत्र-कुत्र भ्रमणस्य कार्याक्रमः अस्ति?
जीनूः: आमेर दुर्ग, जयगढ़ दुर्ग, हवामहल इत्यादय स्थाने।
कोमलः: जयपुर नगरं परितः भित्ति अस्ति।
जीनूः: जयपुर गुलाबी सिटी नाम्ना प्रसिद्धः अस्ति।
17 अनुवादकार्यम् (Translation)
(i) पेड़ के ऊपर पक्षी बैठे हैं। -> वृक्षस्य उपरि खगाः तिष्ठन्ति।
(उपरि के योग में षष्ठी)
(ii) अनीता ने आज खाना नहीं खाया। -> अनीता अद्य भोजनं न अखादत्।
(भूतकाल = लङ् लकार)
(iii) राजा प्रजा को धन देता है। -> नृपः प्रजाभ्यः धनं ददाति।
(देने के योग में चतुर्थी)
(iv) हम दोनों गाना गाते हैं। -> आवां गीतं गायावः।
(आवाम् = हम दोनों, उत्तम पुरुष द्विवचन)
(v) मेरे पिताजी डॉक्टर हैं। -> मम पिता चिकित्सकः अस्ति।
(सम्बन्ध में षष्ठी – मम)
(vi) हम 10वीं कक्षा में पढ़ते हैं। -> वयं दशम्यां कक्षायां पठामः।
(अधिकरण कारक – सप्तमी)
18 कथा-क्रमसंयोजनम् (Story Ordering)
सही क्रम (Correct Sequence):
1. (v) एकदा एकः मकरः नद्यां वसति स्म। (एक बार एक मगरमच्छ नदी में रहता था।)
2. (i) नद्याः तटे फलोपेतः जम्बूवृक्षः आसीत्। (नदी तट पर जामुन का पेड़ था।)
3. (iii) तस्य शाखायां वानरः वसति स्म। (उसकी शाखा पर बंदर रहता था।)
4. (ii) मकरः वानरेण पातितानि मधुरफलानि आस्वाद्य अचिन्तयत्। (मगरमच्छ फल खाकर सोचा…)
5. (vi) “फलानि अतिमधुराणि” अतः वानर हृदयं खादामि। (फल मीठे हैं, तो बंदर का दिल खाऊंगा।)
6. (iv) वानरः मकरस्य प्रयासं बुद्धि चातुर्येण विफलीकृतवान्। (बंदर ने प्रयास विफल किया।)
अथवा / OR

अनुच्छेद लेखन – “सत्संगति”

मञ्जूषा: सतां सङ्गतिः, मानव जीवने, यशं सुखं च, दोष निवारणः, विचारधारा, गुणयुक्त

सतां सङ्गतिः ‘सत्संगतिः’ कथ्यते। (सज्जनों की संगति को सत्संगति कहते हैं।) मानव जीवने सत्संगतेः महती आवश्यकता वर्तते। (मानव जीवन में सत्संगति की बहुत आवश्यकता है।) सत्संगतिः मानवाय यशं सुखं च ददाति। (सत्संगति मनुष्य को यश और सुख देती है।) एषा मानवानां दोष निवारणः करोति। (यह मनुष्यों के दोषों का निवारण करती है।) सत्संगत्या एव विचारधारा पवित्रा भवति। (सत्संगति से ही विचारधारा पवित्र होती है।) अतः मानवः सर्वदा गुणयुक्तः भवेत्। (इसलिए मनुष्य को हमेशा गुणवान होना चाहिए।)

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