Class 12th – History – Chapter 01. ईंटें , मनके तथा अस्थियाँ (हड़प्पा सभ्यता) – Bricks, Beads and Bones (Harappan Civilization)

Class 12 History – Chapter 1: Bricks, Beads and Bones
Class 12 • History

ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ

Chapter 1: Bricks, Beads and Bones

An in-depth exploration of the Harappan Civilisation, its urban planning, economic strategies, and social structures. Designed for CBSE Board Exam mastery.

Time Period
2600-1900 BCE
Mature Harappan
Total Area
13L+ km²
Approx Extent
Inscriptions
3000+
Found so far
Key Feature
शहरी नियोजन
Urban Planning

1. हड़प्पा सभ्यता: एक परिचय

VSA Focus
संस्कृति बनाम सभ्यता (Culture vs Civilization)

पुरातत्व में ‘संस्कृति’: यह पुरावस्तुओं (जैसे मुहरें, मनके, बाट) के ऐसे समूह को कहते हैं जो एक विशिष्ट शैली के होते हैं और एक विशेष काल-खंड तथा भौगोलिक क्षेत्र में एक साथ पाए जाते हैं।

संस्कृति (Culture)

यह आन्तरिक है (मूल्य, विचार, कला, विश्वास)।
“हम क्या हैं (What we are)”

सभ्यता (Civilization)

यह बाह्य/भौतिक है (नगर, तकनीक, भवन, कानून)।
“हमारे पास क्या है (What we have)”

*हड़प्पा एक ‘सभ्यता’ है क्योंकि इसमें उन्नत नगर नियोजन था, और एक ‘संस्कृति’ भी है क्योंकि इसकी अपनी विशिष्ट कला शैली थी।

निर्माता (Who were the Founders?)

उत्खनन में 4 प्रकार के अस्थि-पंजर (Skeletons) मिले हैं:

  • प्रोटो-आस्ट्रोलॉयड (Proto-Australoid)
  • भूमध्य सागरीय (Mediterranean)
  • अल्पाइन (Alpine) & मंगोलियन (Mongolian)

निष्कर्ष: यह मिश्रित प्रजातियों (Mixed Races) की सभ्यता थी। कई विद्वान द्रविड़ (Dravidians) को इसका संस्थापक मानते हैं जो बाद में दक्षिण भारत चले गए।

हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता) प्राचीन भारत की पहली नगरीय सभ्यता है। इसका विस्तार प्रारंभ में 12 लाख 99 हजार 600 वर्ग किमी था, जो अब 15-20 लाख वर्ग किमी तक संभावित है। इसे ‘सिंधु-सरस्वती संस्कृति’ भी कहा जाता है क्योंकि इसके कई स्थल सरस्वती नदी घाटी में भी मिले हैं।

कालानुक्रम (Chronology)

आरंभिक हड़प्पा (Early Harappan)
6000 BCE – 2600 BCE

कृषि बस्तियों का विकास, मृदभांड शैली, और प्रारंभिक किलेबंदी।

परिपक्व हड़प्पा (Mature Harappan)
2600 BCE – 1900 BCE

शहरी चरण: प्रथम नगरीय क्रांति, कांस्य युग (Bronze Age), शांतिवादी दृष्टिकोण।

उत्तर हड़प्पा (Late Harappan)
1900 BCE – 1300 BCE

पतन का काल: शहरों का त्याग, ग्रामीण संस्कृति की ओर वापसी।

2. निर्वाह के तरीके (Subsistence Strategies)

SA Focus

हड़प्पा निवासी पौधे व जानवरों से भोजन प्राप्त करते थे। वे शाकाहारी और मांसाहारी दोनों थे।

मुख्य आहार (Diet)
  • अनाज: गेहूँ, जौ, दाल, सफेद चना, तिल, बाजरा (गुजरात)।
  • सब्जियां/फल: मटर, खजूर, अनार, तरबूज, नींबू, नारियल।
  • मांस: मछली, कछुआ (Turtle), घड़ियाल (Ghariyal), भेड़, बकरी, सूअर।
कृषि प्रौद्योगिकी (Agriculture Tech)
  • हल: बनावली (हरियाणा) से मिट्टी के हल के खिलौने।
  • जुते हुए खेत: कालीबंगन (राजस्थान) – दो फसलें एक साथ।
  • सिंचाई: शोर्तुघई (अफगानिस्तान) में नहरें। धौलावीरा में जलाशय।
  • औजार: फसल काटने के लिए पत्थर या धातु के हँसिये।
चिकित्सा ज्ञान (Medical Knowledge)

वे जड़ी-बूटियों, नीम, शिलाजीत और समुद्र के फेन (Cuttlefish bone) से औषधि बनाते थे। हिरण के सींगों का चूर्ण भी दवा के रूप में प्रयुक्त होता था।

3. मोहनजोदड़ो: एक नियोजित शहरी केंद्र

Long Answer Focus

हड़प्पा सभ्यता का नगर नियोजन ‘जाल पद्धति’ (Grid/Chessboard Pattern) पर आधारित था। सड़कें समकोण पर काटती थीं।

ईंटों के प्रकार (Brick Types)
  • आयताकार (4:2:1): सामान्य निर्माण।
  • L-प्रकार: कोनों (Corners) के लिए।
  • T-प्रकार: सीढ़ियों के लिए।
  • नोकदार (Wedge): कुओं के निर्माण के लिए।
सड़क व सफाई
  • सड़कें: मिट्टी की बनी (कालीबंगन में पक्की सड़क के साक्ष्य)।
  • नालियाँ: पक्की ईंटों और जिप्सम/चूने से प्लास्टर। थोड़ी दूर पर ‘शोषक कूप’ (Soak pits) होते थे।

दुर्ग (The Citadel)

  • ऊँचाई पर स्थित, दीवारों से घिरा।
  • विशाल स्नानागार: 11.88 x 7.01 x 2.43 मीटर। (जिप्सम से जलबंध)।
  • अन्न भंडार: 18 x 7 मीटर की 6-6 पंक्तियाँ (हड़प्पा)।

निचला शहर (Lower Town)

  • आवासीय भवन (आंगन केंद्रित)।
  • दरवाजे: मुख्य सड़क की बजाय गलियों में खुलते थे (शोर/प्रदूषण से बचाव)।
  • गोपनीयता (Privacy): भूतल पर खिड़कियाँ नहीं।

4. शिल्प उत्पादन और व्यापार (Craft & Trade)

MCQ/Map Work
कच्चा माल (Material) प्राप्ति का स्रोत विवरण
शंख (Shell) नागेश्वर, बालाकोट तटीय बस्तियाँ (चूड़ियाँ, करछियाँ)
लाजवर्द मणि शोर्तुघई (अफगानिस्तान) नीला कीमती पत्थर
ताँबा (Copper) खेतड़ी (RJ), ओमान गणेश्वर-जोधपुरा संस्कृति
सोना (Gold) दक्षिण भारत (कर्नाटक) अभियान (Expeditions) भेजे जाते थे
कला, मनोरंजन और विदेशी संपर्क
  • मूर्तियाँ: काँस्य नर्तकी (मोहनजोदड़ो), पुरोहित राजा (सेलखड़ी), लाल धड़ (हड़प्पा)।
  • अद्वितीय खोज: चन्हुदड़ो से ईंटों पर ‘बिल्ली का पीछा करते हुए कुत्ते’ के पंजे के निशान मिले हैं।
  • विदेशी मुहरें: मोहनजोदड़ो से मेसोपोटामिया की 5 बेलनाकार मुहरें (Cylindrical Seals) और लोथल से फारस की गोलाकार मुहर मिली है।
  • वस्त्र: सूती कपड़े के साक्ष्य मोहनजोदड़ो (चांदी के बर्तन में लिपटे) से मिले हैं। चन्हुदड़ो की मूर्ति में ‘पगड़ी’ दिखी है।
  • मृदभांड: ‘चालाक लोमड़ी’ (Panchatantra style) का चित्रण लोथल से मिले जार पर।
  • धातु ज्ञान: वे काँसा (Copper + Tin) बनाते थे। लोहा (Iron) अज्ञात था।

5. सामाजिक जीवन और वैचारिक विस्तार

Deep Dive

सामाजिक वर्ग (Social Classes)

गार्डन चाइल्ड के अनुसार 4 वर्ग:

  • 1. शिक्षित वर्ग: पुरोहित, चिकित्सक, जादूगर।
  • 2. योद्धा/सैनिक: दुर्गों में उपस्थिति के संकेत।
  • 3. व्यापारी/दस्तकार: बुनकर, कुम्हार, सुनार।
  • 4. श्रमिक/कृषक: मछली पकड़ने वाले, किसान।

शवाधान (Burials)

3 प्रकार: पूर्ण समाधिकरण, आंशिक समाधिकरण, दाह कर्म (कलश)।

  • दिशा: आमतौर पर उत्तर-दक्षिण। (हड़प्पा में एक ताबूत (Coffin) दक्षिण-उत्तर मिला)।
  • कब्रिस्तान: हड़प्पा में R-37 (मुख्य) और Cemetery H (परवर्ती) मिले हैं।
  • लोथल: युग्म शव (Joint Burial) – सती प्रथा का संकेत? करवट लिए हुए शव।

धार्मिक जीवन और प्रतीक (Religion & Symbols)

  • मातृदेवी: नारी मृण्मूर्तियाँ (Fertility Goddess)।
  • आद्य शिव (Proto-Shiva): पशुपति (जानवरों से घिरे योगी)।
  • प्रकृति पूजा: पीपल, कूबड़ वाला सांड (Humped Bull)।
  • पवित्र चिह्न: स्वास्तिक (Swastika) और क्रॉस (Cross)।
  • लिंग पूजा: पत्थर के लिंग (Phallus worship)।
  • शमन (Shamans): जादुई शक्ति वाले लोग।
प्राचीन सत्ता

मोहनजोदड़ो में 70m x 24m का विशाल भवन (सभा भवन/कॉलेज?) मिला है।

व्हीलर: पुरोहितों का शासन
हंटर: लोकतंत्रात्मक
लिपि (Script)
  • भावचित्रात्मक (Pictographic)
  • Boustrophedon: दोनों ओर से लिखी जाने वाली।
  • प्रयास: 1925 में वेंडेल (Waddell), नटवर झा, महादेवन ने प्रयास किए, पर असफल रहे।
मेसोपोटामियाई नाम
मेलुहा (Meluha) हड़प्पा

“इसे नाविकों का देश (Land of Sailors) कहा गया है।”

मगान (Magan) ओमान
दिलमुन (Dilmun) बहरीन
हाजा पक्षी (Haja Bird): मेसोपोटामियाई मिथक में मोर (Peacock) का उल्लेख है, जिसकी आवाज राजप्रसाद में गूँजती थी।

6. खोज का इतिहास और पतन

History

1856 (कराची-लाहौर रेलवे): पहली बार हड़प्पा की ईंटें चुराई गईं, जिसे जॉन ब्रटन ने देखा पर खुदाई नहीं की। 1921 में दयाराम साहनी और 1922 में राखाल दास बनर्जी (जिन्होंने कुषाण स्तूप की खोज में मोहनजोदड़ो ढूंढा) ने इसका उत्खनन किया। 1924 में जॉन मार्शल ने विधिवत घोषणा की।

मोहनजोदड़ो के नाम
मृतकों का टीला प्रेतों का टीला सिंध का बाग नखलिस्तान
पतन के कारण

ऋग्वेद में ‘हरियूपिया’ (हड़प्पा?) के विनाश का उल्लेख है।

  • बाढ़ (मैके/राव), जलवायु परिवर्तन (अमलानंद घोष), महामारी, भूकंप।
  • राखीगढ़ी DNA शोध ‘आर्य आक्रमण’ सिद्धांत को नकारता है।

7. बोर्ड परीक्षा प्रश्न बैंक (Comprehensive Q&A)

Strictly based on CBSE Marking Scheme pattern.

A. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VSA – 1 Mark)

Q1. ‘चालाक लोमड़ी’ का चित्र कहाँ मिला?

उत्तर: लोथल के एक मृदभांड (Jar) पर।

Q2. हड़प्पा में किस प्रकार की ईंटें कोनों में लगती थीं?

उत्तर: L-आकार की ईंटें।

Q3. युग्म शवाधान (Joint Burial) कहाँ मिला?

उत्तर: लोथल (सती प्रथा का संकेत)।

Q4. हड़प्पावासी किस धातु से परिचित नहीं थे?

उत्तर: लोहा (Iron) और पीतल (Brass)।

Q5. हड़प्पा लिपि की दिशा क्या थी?

उत्तर: दाईं से बाईं ओर (Right to Left)।

Q6. हड़प्पा सभ्यता की सबसे विशिष्ट पुरावस्तु?

उत्तर: हड़प्पाई मुहर (सेलखड़ी पत्थर)।

Q7. कुत्ता बिल्ली का पीछा करते हुए – निशान कहाँ मिले?

उत्तर: चन्हुदड़ो में ईंटों पर।

Q8. मेसोपोटामियाई लेखों में ‘मगान’ किसे कहा गया?

उत्तर: ओमान को (ताँबे का स्रोत)।

Q9. विशाल स्नानागार कहाँ स्थित है?

उत्तर: मोहनजोदड़ो के दुर्ग में।

Q10. शवाधान ‘R-37’ कहाँ स्थित है?

उत्तर: हड़प्पा में।

B. लघु उत्तरीय प्रश्न (SA – 3 Marks)

Q1. मोहनजोदड़ो के ‘निचले शहर’ की विशेषताएँ बताइए।

  • गोपनीयता: खिड़कियों का अभाव, मुख्य द्वार से आंगन नहीं दिखता था।
  • आंगन: घर का केंद्र, जहाँ खाना पकाया जाता था।
  • जल निकासी: हर घर में स्नानघर और नालियों का सड़क से जुड़ाव।

Q2. मनका बनाने की प्रक्रिया का वर्णन करें।

  • पदार्थ: कार्नीलियन, जैस्पर, स्फटिक, ताँबा, सोना, शंख।
  • तकनीक: पत्थर को तोड़ना, घिसाई, पॉलिश, और वेधन (Drilling)।
  • केंद्र: चन्हुदड़ो, लोथल और धोलावीरा।

Q3. हड़प्पा लिपि को रहस्यमयी क्यों कहा जाता है?

  • यह आज तक अपठनीय है।
  • इसमें चिह्नों की संख्या बहुत अधिक (375-400) है, यह वर्णमालीय नहीं है।
  • 1925 में वेंडेल और बाद में नटवर झा के प्रयासों के बावजूद इसे प्रमाणित रूप से पढ़ा नहीं जा सका।

C. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LA – 8 Marks)

Q1. हड़प्पा सभ्यता की जल निकास प्रणाली नगर नियोजन का सर्वोत्तम उदाहरण है। स्पष्ट कीजिए।

भूमिका: हड़प्पा की सबसे अनूठी विशेषता इसकी नियोजित जल निकास प्रणाली थी।

  • ग्रिड पद्धति: सड़कें समकोण पर काटती थीं (ऑक्सफोर्ड सर्कस/शतरंज बोर्ड)।
  • निर्माण: नालियाँ पकी ईंटों से बनी और ढकी हुई थीं। जिप्सम का प्रयोग।
  • सफाई: मेनहोल और शोषक कूप (Soak pits) की व्यवस्था।
  • घरों का जुड़ाव: हर घर की नाली गली की मुख्य नाली में मिलती थी।

निष्कर्ष: रामशरण शर्मा के अनुसार किसी अन्य कांस्य युगीन सभ्यता ने सफाई को इतना महत्व नहीं दिया।

Q2. हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारणों का विश्लेषण करें।

भूमिका: 1900 BCE के बाद सभ्यता का ह्रास हुआ।

  • जलवायु परिवर्तन: वर्षा में कमी (अमलानंद घोष/डी.पी. अग्रवाल)।
  • बाढ़: सिंधु नदी में अत्यधिक बाढ़ (मैके व एस.आर. राव)।
  • नदियों का सूखना: सरस्वती नदी का विलुप्त होना।
  • आर्य आक्रमण: व्हीलर ने ऋग्वेद के ‘हरियूपिया’ के आधार पर दावा किया, जो अब अमान्य है।

D. स्रोत आधारित प्रश्न (4 Marks)

“एक मूर्ति को ‘पुरोहित-राजा’ की संज्ञा दी गई… पुरातत्वविद् मेसोपोटामिया से परिचित थे…”

Q1. यह मूर्ति कहाँ मिली? मोहनजोदड़ो।

Q2. यह नाम क्यों दिया गया? मेसोपोटामियाई ‘पुरोहित-राजाओं’ की समानता के कारण।

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